सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Ramayan(Ramayan hi naam kiyu or koi naam kiyu nahi)

 Ramayan

(Ramayan hi kiu or koi naam kiyo nahi)

दोस्तों मेरा नाम  कांतिलाल सुथर है।
Part no.1
रामायण प्राचीन भारत का एक अतिलोकप्रिय महाकाव्य हैं। रामायण का मतलब है अयोध्या के राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र राम की सम्पूर्ण जीवनगाथा। रामायण की मूल रचना महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत भाषा में की थी, बाद में तुलसीदास ने इन छन्दों की रचना हिन्दी में रामचरितमानस के रूप में की। रामायण में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के चारित्रिक गुणों और बुराई पर अच्छाई की जीत की विस्तारपूर्वक चर्चा की गयी है। रामायण में लिखे गये मानवीय मूल्यों को पढ़कर भारतवासी इसे श्रद्धा और आदर की दृष्टि से देखते हैं। 

यह हिंदु धर्म का सबसे पवित्र धर्म ग्रन्थ माना जाता है। भारत के अधिकांश मंदिरों में सुबह और शाम रामायण की चौपाइयां बड़े ही भक्ति भाव से गायी जाती है।

click on link .war of Lanka(Book of Amazon) 
Buy on amazon

(Ramayan hi kiu or koi naam kiyo nahi)

अगला भाग जल्द ही अगले ब्लॉग पर आ रहा है.

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी blog से कोई भी परेशानी हो तो हमें kantilalsutharhyd@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

मित्रों यह पोस्ट Ramayan (Ramayan hi naam kiyu or koi naam kiyu nahi) part.1 आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें और Ramayan (Ramayan hi naam kiyu or koi naam kiyu nahi) part.2 पोस्ट के लिये इस ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करें और इसे शेयर भी करें।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

राम जी को वनवास ...Ramayan (Ramayan hi kiyu or koi kiu naam nahi) P16

                                  PART.16                             दोस्तों मेरा नाम कांतिलाल सुथार आज देखते है     राम  जी को वनवास  कियु हुवा था राम के पिता दशरथ ने उनकी सौतेली माता कैकेयी को उनकी किन्हीं दो इच्छाओं को पूरा करने का वचन (वर) दिया था। कैकेयी ने दासी मन्थरा के बहकावे में आकर इन वरों के रूप में राजा दशरथ से अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या का राजसिंहासन और राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा। पिता के वचन की रक्षा के लिए राम ने खुशी से चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार किया। पत्नी सीता ने आदर्श पत्नी का उदाहरण देते हुए पति के साथ वन (वनवास) जाना उचित समझा। भाई लक्ष्मण ने भी राम के साथ चौदह वर्ष वन में बिताए। भरत ने न्याय के लिए माता का आदेश ठुकराया और बड़े भाई राम के पास वन जाकर उनकी चरणपादुका (खड़ाऊँ) ले...

राम जी के जीवन की प्रमुख घटनाएं...Ramayan (Ramayan hi kiyu or koi kiu naam nahi) P15

  PART. 15 दोस्तों मेरा नाम  कांतिलाल सुथार आज देखते है  राम  जी   के जीवन की प्रमुख घटनाएं पुराणों में श्री राम के जन्म के बारे में स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं कि श्री राम का जन्म वर्तमान  भारत  के  अयोध्या  नामक नगर में हुआ था। अयोध्या, जो कि भगवान राम के पूर्वजों की ही राजधानी थी। रामचन्द्र के पूर्वज रघु थे। भगवान राम बचपन से ही शान्‍त स्‍वभाव के वीर पुरूष थे। उन्‍होंने मर्यादाओं को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया था। इसी कारण उन्‍हें  मर्यादा पुरूषोत्तम राम  के नाम से जाना जाता है। उनका राज्य न्‍यायप्रिय और खुशहाल माना जाता था। इसलिए भारत में जब भी सुराज (अच्छे राज) की बात होती है तो रामराज या रामराज्य का उदाहरण दिया जाता है। धर्म के मार्ग पर चलने वाले राम ने अपने तीनों भाइयों के साथ गुरू वशिष्‍ठ से शिक्षा प्राप्‍त की। किशोरावस्था में गुरु विश्वामित्र उन्‍हें वन में राक्षसों द्वारा मचाए जा रहे उत्पात को समाप्त करने के लिए साथ ले गये। राम के साथ उनके छोटे भाई लक्ष्मण भी इस कार्य में उनके साथ थे। ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र, जो ब्रह्म ...

रावण के 10 सिर ही कियु 11 क्यों नहीं Ramayan (Ramayan hi kiyu or koi kiu naam nahi)P11

Part 11 Ramayan (Ramayan hi kiyu or koi kiu naam nahi )    दोस्तों मेरा नाम  कांतिलाल सुथार आज देखते है  रावण के 10 सिर ही कियु 11 क्यों नहीं  रावण के दस सिर होने की चर्चा रामायण में आती है। वह कृष्णपक्ष की अमावस्या को युद्ध के लिये चला था तथा एक-एक दिन क्रमशः एक-एक सिर कटते हैं। इस तरह दसवें दिन अर्थात् शुक्लपक्ष की दशमी को रावण का वध होता है। रामचरितमानस में यह भी वर्णन आता है कि जिस सिर को राम अपने बाण से काट देते हैं पुनः उसके स्थान पर दूसरा सिर उभर आता था। विचार करने की बात है कि क्या एक अंग के कट जाने पर वहाँ पुनः नया अंग उत्पन्न हो सकता है? वस्तुतः रावण के ये सिर कृत्रिम थे - आसुरी माया से बने हुये। मारीच का चाँदी के बिन्दुओं से युक्त स्वर्ण मृग बन जाना, रावण का सीता के समक्ष राम का कटा हुआ सिर रखना आदि से सिद्ध होता है कि राक्षस मायावी थे। वे अनेक प्रकार के इन्द्रजाल ( जादू ) जानते थे। तो रावण के दस सिर और बीस हाथों को भी कृत्रिम माना जा सकता है। लेकिन कुछ विद्वान मानते हैं कि रावण के दस सिरों की बात प्रतीकात्मक है- उसमें दस मनुष्यों की जितनी बुद्धि थी औ...