सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Rishi Sunak new New British PM

New British PM


 Rishi Sunak New British PM
ऋषि सुनक का प्रारम्भिक जीवन
Early Life of Rishi Sunak
 ऋषि सुनक का जन्म 12 मई 1980 को, यूनाइटेड किंगडम के Southampton Hampshire में हुआ। इनके पूर्वज पंजाब से थे। लेकिन इनके दादा जी पहले पंजाब से East Africa में बसे। केन्या में इनके पिता जी यशवीर का जन्म हुआ। फिर 1960 में वे United Kingdom में बस गए। ऋषि के पिता जी का नाम यशवीर सुनक था। जो कि पेशे से एक डाक्टर थे। ऋषि की माता जी उषा सुनक का जन्म भी तंजानिया में हुआ था।     वह एक Pharmacist थी। जो वहीं पर, एक लोकल फार्मेसी चलाती थी। ऋषि सुनक को, यहां तक पहुंचने में काफी स्ट्रगल करना पड़ा। उनका कहना है कि एक समय वो अपनी मां की छोटी सी दुकान पर काम किया करते हैं। इनके माता-पिता ने ऋषि की शिक्षा व कैरियर को लेकर, काफी स्ट्रगल किया। ऋषि को फुटबॉल खेलने क्रिकेट वह फुटबॉल खेलने का बहुत शौक है।
Rishi Sunak Finance Minister of United Kingdom। Britain Prime Minister – Rishi Sunak Latest News ऋषि सुनक का जीवन परिचय। ब्रिटिश सांसद ऋषि सुनक जो प्रधानमंत्री से ज्यादा लोकप्रिय। भारतीय मूल के ऋषि सुनक, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के दावेदार। ब्रिटेन के नए पीएम ऋषि सुनक। ब्रिटेन को अब चलाएगा, भारतवंशी ऋषि सुनक।
Rishi Sunak - Chancellor of the Exchequer
Biography in Hindi
 तब तक मेहनत करते रहो। जब तक आपको अपना परिचय, खुद किसी के आगे देने की जरूरत न पड़े। एक ऐसा कारण, दुनिया को जरूर देकर जाना। जिससे सारी दुनिया आपके नाम को हमेशा याद रखें। जिंदगी में कुछ ऐसा जरूर कर जाना। ताकि एक दिन आपको अपने आप पर गर्व महसूस हो सके। आपके सपने तब तक पूरे नहीं होंगे। जब तक आप उनके लिए, कुछ plan नहीं करते और आपके plan तब तक पूरे नहीं होंगे। जब तक आप उन पर चलना शुरू नहीं कर देते।
       अपनी पहचान बनाने के लिए, आपको दुनिया को बताना पड़ेगा कि आप कौन हैं। इसके लिए आपको कुछ ऐसा करना पड़ेगा। जो लाखों में कोई एक करता है। याद रखिए कि हर ताज के लिए, एक सर  होता है। लेकिन हर सर के लिए, ताज नहीं होता। उस ताज के लिए, पहले आपको राजा की तरह बनना पड़ेगा। ये दुनिया राजा को जानती है। प्रजा को नहीं।
 जिस बर्तानिया की हुकूमत में, कभी सूरज डूबने का दावा नहीं किया जाता था। जिसने सदियों तक भारत को गुलाम बना कर रखा। क्या अब उसी हुकूमत का प्रधानमंत्री भारतीय मूल का एक शख़्स बनने जा रहा है। आसार कुछ ऐसे ही बनते दिख रहे हैं। यह शख़्स है, भारतीय मूल के ऋषि सुनक
ऋषि की प्रारंभिक शिक्षा यूनाइटेड किंगडम के विंचैस्टर कॉलेज में हुई। यहां से शिक्षा पूरी करने के बाद, वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी चले गए। यहां पर उन्होंने पॉलिटिक्स, इकोनॉमिक्स व फिलॉसफी पढ़ाई की। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद। ऋषि MBA करने के लिए, स्टैंडफोर्ट यूनिवर्सिटी चले गए। यहीं पर उनकी मुलाकात अक्षता मूर्ति से हुई।

अक्षता मूर्ति से ऋषि की मुलाकात स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुई। अक्षता मूर्ति, नारायण मूर्ति की बेटी हैं। नारायण मूर्ति वही है। जिन्हें Indian IT Sector का पितामह बोला जाता है। ये Infosys के फाउंडर व चेयरमैन है। अक्षता मूर्ति की मां का नाम सुधा मूर्ति है।

      ऋषि और अक्षता एक-दूसरे को पसंद करने लगे। फिर इन दोनों ने, अगस्त 2009 में शादी कर ली। इनकी शादी बेंगलुरु में हुई। अक्षता अपने पिता की एक निवेश फर्म ‘कटमरेंन वेंचर्स’ की निदेशक हैं। अक्षता अपना खुद का एक फैशन ब्रांड भी चलाती हैं। उनकी गिनती ब्रिटेन की धनी महिलाओं में की जाती है। शादी के बाद, इन दोनों की दो बेटियां हैं। जिनके नाम अनुष्का  सुनक व कृष्णा सुनक है।

ऋषि सुनक ने 2001 से 2004 तक, एक analyst के तौर पर, इंवेस्टमेंट बैंक Goldman Sachs में काम किया। Investment Bank वो होते हैं। जो शेयर मार्किट के लिए काम करते हैं। इसके बाद ऋषि ने एक नई फर्म The Children’s Investment Fund Management के लिए काम किया।

     जहाँ वे सितंबर 2006 में उसके Partner भी बने। फिर वह नवंबर 2009 में, अपने अन्य पूर्व सहयोगियों के साथ, Theleme में partner के रूप में शामिल हुए। जो अक्टूबर 2010 में, $700 मिलियन के साथ launch हुआ था। ऋषि सुनक अपने ससुर नारायण मूर्ति के स्वामित्व वाली निवेश फर्म ‘Catamaran Ventures’ के निदेशक भी रहे।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

राम जी को वनवास ...Ramayan (Ramayan hi kiyu or koi kiu naam nahi) P16

                                  PART.16                             दोस्तों मेरा नाम कांतिलाल सुथार आज देखते है     राम  जी को वनवास  कियु हुवा था राम के पिता दशरथ ने उनकी सौतेली माता कैकेयी को उनकी किन्हीं दो इच्छाओं को पूरा करने का वचन (वर) दिया था। कैकेयी ने दासी मन्थरा के बहकावे में आकर इन वरों के रूप में राजा दशरथ से अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या का राजसिंहासन और राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा। पिता के वचन की रक्षा के लिए राम ने खुशी से चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार किया। पत्नी सीता ने आदर्श पत्नी का उदाहरण देते हुए पति के साथ वन (वनवास) जाना उचित समझा। भाई लक्ष्मण ने भी राम के साथ चौदह वर्ष वन में बिताए। भरत ने न्याय के लिए माता का आदेश ठुकराया और बड़े भाई राम के पास वन जाकर उनकी चरणपादुका (खड़ाऊँ) ले...

राम जी के जीवन की प्रमुख घटनाएं...Ramayan (Ramayan hi kiyu or koi kiu naam nahi) P15

  PART. 15 दोस्तों मेरा नाम  कांतिलाल सुथार आज देखते है  राम  जी   के जीवन की प्रमुख घटनाएं पुराणों में श्री राम के जन्म के बारे में स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं कि श्री राम का जन्म वर्तमान  भारत  के  अयोध्या  नामक नगर में हुआ था। अयोध्या, जो कि भगवान राम के पूर्वजों की ही राजधानी थी। रामचन्द्र के पूर्वज रघु थे। भगवान राम बचपन से ही शान्‍त स्‍वभाव के वीर पुरूष थे। उन्‍होंने मर्यादाओं को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया था। इसी कारण उन्‍हें  मर्यादा पुरूषोत्तम राम  के नाम से जाना जाता है। उनका राज्य न्‍यायप्रिय और खुशहाल माना जाता था। इसलिए भारत में जब भी सुराज (अच्छे राज) की बात होती है तो रामराज या रामराज्य का उदाहरण दिया जाता है। धर्म के मार्ग पर चलने वाले राम ने अपने तीनों भाइयों के साथ गुरू वशिष्‍ठ से शिक्षा प्राप्‍त की। किशोरावस्था में गुरु विश्वामित्र उन्‍हें वन में राक्षसों द्वारा मचाए जा रहे उत्पात को समाप्त करने के लिए साथ ले गये। राम के साथ उनके छोटे भाई लक्ष्मण भी इस कार्य में उनके साथ थे। ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र, जो ब्रह्म ...

रावण के 10 सिर ही कियु 11 क्यों नहीं Ramayan (Ramayan hi kiyu or koi kiu naam nahi)P11

Part 11 Ramayan (Ramayan hi kiyu or koi kiu naam nahi )    दोस्तों मेरा नाम  कांतिलाल सुथार आज देखते है  रावण के 10 सिर ही कियु 11 क्यों नहीं  रावण के दस सिर होने की चर्चा रामायण में आती है। वह कृष्णपक्ष की अमावस्या को युद्ध के लिये चला था तथा एक-एक दिन क्रमशः एक-एक सिर कटते हैं। इस तरह दसवें दिन अर्थात् शुक्लपक्ष की दशमी को रावण का वध होता है। रामचरितमानस में यह भी वर्णन आता है कि जिस सिर को राम अपने बाण से काट देते हैं पुनः उसके स्थान पर दूसरा सिर उभर आता था। विचार करने की बात है कि क्या एक अंग के कट जाने पर वहाँ पुनः नया अंग उत्पन्न हो सकता है? वस्तुतः रावण के ये सिर कृत्रिम थे - आसुरी माया से बने हुये। मारीच का चाँदी के बिन्दुओं से युक्त स्वर्ण मृग बन जाना, रावण का सीता के समक्ष राम का कटा हुआ सिर रखना आदि से सिद्ध होता है कि राक्षस मायावी थे। वे अनेक प्रकार के इन्द्रजाल ( जादू ) जानते थे। तो रावण के दस सिर और बीस हाथों को भी कृत्रिम माना जा सकता है। लेकिन कुछ विद्वान मानते हैं कि रावण के दस सिरों की बात प्रतीकात्मक है- उसमें दस मनुष्यों की जितनी बुद्धि थी औ...